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आपा के मुर्गे को जब कर दिया मैंने क़ुर्बान

आपा  के मुर्गे को जब कर दिया मैंने क़ुर्बान दोस्तों में बढ़ गई मेरी शान मुर्ग़ा करता था सबको परेशान बिना कर उसकी  बिरयानी  ,कर दिया मैंने सबको हैरान मुर्गे के नख़रे थे दो हज़ार शोर करता रहता था वो बार-बार मुझे नहीं था इस से कोई  सरोकार बस मुझे  बिरयानी  की प्लेट थी  दरकार आपा  का जवाब तुमने तो कर दिया मेरे मुर्गे को क़ुर्बान बिरयानी  बना कर सबको कर दिया हैरान मगर ये नहीं सोचा कि अब कोई सह्र में नहीं देता बाँग हालाँकि वो फ़रिश्तों को देखकर देता है बाँग तुम्हें तो नहीं इस से कोई  सरोकार  है मगर मुझे इस से बड़ा प्यार है इस की मासूम अदाऐं और अंदाज़ मेरे दिल-ए-पर करती हैं असर-अंदाज़ तुमने जब से इस पर बुरी नज़र डाली है मैंने उसकी बढ़ा ली रखवाली है